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Dengu Aur Maleriya ka Desi Ilaj (Full Knowledge)

 Dengu Aur Maleriya ka Desi Ilaj  नॉर्मली बुखार  -दोस्तो बुखार एक ऐसी बीमारी है जिससे आप सब  परिचित होंगें बुखार हर किसी व्यक्ति को आता है !जब दोस्तों बुखार नार्मल ही होता है तो इसमें सर दर्द ,बदन दर्द  आदि  तख्लीफो का सामना करना पड़ता है पर जब बुखार अधिक तेज हो तो बहुत ही दिक्कतों का सामना करना करना पड़ता हैं  जब बुखार अधिक दिनों तक रहे तो ये चिकिन गुनिया ,टाइफाइड आदि के लक्षणं  भी हो सकते हैं बुखार यदि नॉर्मली है  या शरीर में अलस पन  है  तो संशमनी  की दो गोली सुबह और दो गोली शाम को ले लेनी चाहिए अर्थात रात्रि में ६ -८ पत्ते नीम के तथा ११ पत्ते तुलसी के खाने से अथवा पुदीना ,तुलसी के कुछ पत्तो में से रस निकाल कर और ३ ग्राम शक्कर डालकर  उसे पिले  इसके पीने से हलके बुखार में बहुत फायदा मिलता है या फिर काढ़ा भी पीला सकते हैं यदि बुखार अधिक तेज हो तो उस व्यक्ति को दवा न खिलाएं  पहले उसके सर पर पानी में भीगा हुआ कपड़ा डाल  दे  और कुछ समय बाद जब बुखार कम  हो जाये तो  तो ही उसे गोली  मतलव  दबा  का सेवन करें  और हो सके तो  बुखार बाले व्यक्ति खाने में करेले  की सब्जी का प्रयोग करे  करेले की सब्जी ही खिलाये 

 

 

 

बुखार के प्रकार -[१] नॉर्मली बुखार  [२] डेंगू   [३]मलेरिया [४] टाइफाइड  [५] चिकिन गुनिया   [२]  डेंगू -आजकल डेंगू एक बहुत बड़ी समस्या का कारण बन गया है जिसकी बजह से कई लोगो की जान जा रही है ये एक ऐसा वायरल रोग है जिसका मेडिकल चिकित्सा पद्धति में कोई इलाज नहीं है परन्तु आयुर्वेदिक  से इसका इलाज है और वह सरल और बहुत सस्ता है की इसको कोई भी अपना सकता है इस बुखार को  आसानी से पहचाना जा सकता है जैसे सर में दर्द आँखों के पीछे दर्द होना , उल्टिया आना ,त्वचा सुखना तथा खून की प्लेटलेट की मात्रा का तेजी से कम होना डेंगू के कुछ मूल लक्छण  हैं जिन का पता लगने  या जिनका समय से इलाज न किया जाये तो व्यक्ति की मौत भी हो सकती है 

 

 

डेंगू बुखार के घरेलु उपचार –गिलोय बेल की डंडी लें डंडी के छोटे टुकड़े करें 
[२]अब इसको एक पानी से भरे ग्लास में उबालें  जब पानी आधा या आधे से कम रह जाये तो उसे ठंडा होने पर रोगी को पिलायें            
[३] अब मात्र ४५ मिनट बाद cell  बनने सुरु हो जायेंगे  ये डेंगू का बहुत ही अच्छा इलाज है                        

[४] यदि किसी व्यक्ति को ये रोग है तो उस व्यक्ति को ये चार चीजों को ही खिलाएं 
अनार का जूस 
गेहूं का रस या गेहू घास रस का प्रयोग करें 

 

 

पपीते के पत्ते का रस 
अमर वेल या गिलोय 
अनार जूस तथा  गेहूं घास रस नाया खून बनाने तथा रोगी को बिमारी से लड़ने की सकती देता है ा  अनार जूस आसानी से हर जगह उपलब्ध है गेहूं न मिलने पर रोगी को सेव का भी रस दिया जा सकता है पपीता के पत्तो का रस बहुत ही महत्वपूर्ण है इसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर रोगी को पिलाने  पर २-३ बार पिलाने पर एक ही दिन की खुराक में पिलेटलेट की संख्या बढ़ने लगती है ! गिलोय की वेल रोगी को दिन में २ या ३ बार दें इससे खून में पिलेटलेट की संख्या बढ़ने लगती है अगर गिलोय  की वेल न मिले तो नजदीखि  पतंजलि स्टोर से गिलोय गहनवाटी  ले  आये  और दिन में तीन बार एक एक गोली दे  यदि रोगी को बार बार उलटी  आ रही  हे तो उसे सेव का रस पिलादें इससे उल्टियां बंद हो जाएँगी                           



मलेरिया के घरेलु उपचार –
 जब किसी व्यक्ति को जब कोई मादा मच्छर काटता है तो एनोफिलीस जीवाणु मच्छर के शरीर से निकल कर व्यक्ति के खून में चले जाते हैं  और  व्यक्ति को रोग ग्रस्त कर देते हैं  अगर कोई व्यक्ति पहले से ही मलेरिया से पीड़ित है और उसे मादा मच्छर काट लेदूसरा व्यक्ति भी मलेरिया से ग्रस्त हो जाता है  

मलेरिया रोग की पहचान एवं इलाज  मलेरिया रोग से पीड़ित व्यक्ति को ठण्ड देकर बुखार आता है और रोगी के सर में दर्द ,पैरों में दर्द रहता और बुखार  ३-४ दिन बाद आता रहता है अर्थात उसका बुखार जीवाणु पर निर्भर रहता है मलेरिया रोग के कारण रोगी के शरीर में खून की भी कमी होती है 

                        

मलेरिया रोग बुड़ाह   बच्चा सब को हो  सकता है इसका इलाज है भुना नमक  भुना नमक  के सेवन से  क्या जाता है   सादा नमक को तवेह  पर रखकर उसे  खूब भुंजे जबतक वह भूरा काला न हो जाये फिर उसे सीसे की बोतल में रखले ये दवा मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति के लिए बहुत ही उपयोगी है   

टीफाइड का इलाज –typhid रोग से पीड़ित रोगी के शरीर में हर समय बुखार रहता है तथा यह बुखार शाम को और तेज हो जाता है typhid से पीड़ित व्यक्ति को सर में दर्द रहता है ,उलटी और जी मछलना ,भूँक नही लगना ,मांश पेसियों में दर्द रहना तथा कब्ज और दस्त की समस्या भी हो जाती है 

 

                                        
typhaid  रोगी को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति तब तक उपवास रखना चाहिए जब तक की उसके शरीर में typhaid रोग होने के लक्छड़ दूर ना हो जाएँ भीड़ उसके बाद दाल चीनी के काडे में काली मिर्च और शहद मिलाकर खुराक के रूप में लेना चाहिए ये रोगी व्यक्ति के लिए बहुत ही लाभदायक है  यदि typhid रोग का प्रभाव बहुत तेज हो तो रोगी के माथे पर डंडी गीली कपडे की पट्टी रखनी चाहिए तथा उसके शरीर पर गीली चादर लपेटनी चाहिए  इसके बाद गर्म पानी से स्नान  कराना चाहिए 
typhid रोग से पीड़ित व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी पर बर्फ की मालिश करनी चाहिए  इससे रोगी ठीक हो जाता है 

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Tahirmalik786

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